Solve of question Distributer process ( फिल्म वितरण व्यवस्था एवं पद्विति (प्रक्रिया) )
भूमिका
फिल्म निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिल्म
बितरण की बारी आती है जहा फिल्मे पर्दे के माध्यम से दर्शको तक पहुचती है। फिल्म
वितरक फिल्म का प्रचार प्रसार करके फिल्मों को सिनेमा घरो तक पहुचाता है इस
प्रक्रिया मे निर्माता,निर्देशक तथा फिल्म वितरक के बीच अनुबंध होता है फिल्म की सफलता मे वितरण का
महत्वपूर्ण योगदान होता है ।
फिल्म वितरण
निर्माण के पश्चात फिल्मे जिस माध्यम से दर्शको तक
पाहुचती है फिल्म वितरण व्यवस्था कहलाती है कोई भी फिल्म अपनी कहानी, प्रस्तुति शैली, अभिनय, गीत संगीत, लोकेसन, सेनेमाटोग्राफी की द्रष्टि से कितनी भी उच्च स्तरिये क्यो न हो यदि बह
दर्शको तक न पहुचे तो उसकी कुछ नहीं रह जाती है
मेरा
आंखो देखा अनुभव है की बहुत सारी फिल्मे वितरक न मिलने के कारण बंद डब्बे मे चली
गई या उनके दिखाने का उचित समय निकाल गया जिससे उस फिल्म को भरी नुकसान उठाना पड़ा
इस से इस बात मे शक नहीं किया जा सकता की फिल्म के व्यापार मे फिल्म वितरण का
प्रमुख योगदान है।
पूरे विश्व मे
फिल्म की एक निश्चित पद्धति है जिसके अनुसार फिल्मे साथ एक बहुत बड़े दर्शक वर्ग के
सामने प्रस्तुत की जाती है जिसके हिसाब से न केबल फिल्मे दर्शको तक पहुचती है
बल्कि फिल्म का व्यापार भी इसी पर निर्भर करता है ।
आजकल तो फिल्मे अपनी फिल्म निर्माण प्रक्रिया के
दौरान ही अपना वितरक तय कर लेती है उसी
दौरान फिल्म की रिलीज़ दिनांक भी तय कर ली जाती है । फिल्मे घरेलू भारतीय बाज़ार एंव
ओवेरसीज रिलीज़ होती है । भारतीय बाजार मे फिल्म
वितरण को 7 जोन मे बांटा गया है जो इस प्रकार है ।
भारतीय फिल्म वितरण क्षेत्र
1 मुम्बई - मुम्बई, गुजरात, गोवा,
कर्नाटका एंव महाराष्ट्र के कुछ जिले ।
2 दिल्ली -
दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड।
3 ईस्ट पंजाब – पंजाब, हरियाणा, चंडीगड़, हिमाचल प्रदेश ।
4 ईस्टर्न सर्केट – पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, असम, उत्तर पूर्वी राज्य ।
5 सी॰पी॰ बरार – पूर्वी महाराष्ट्र, दक्षिदी व पश्चिमी मध्य
प्रदेश एंव छत्तीसगढ ।
6 सेंट्रल इंडिया – राजस्थान, मध्य प्रदेश का शेष भाग ।
7 निज़ाम – हैदराबाद, आंध्रप्रदेश,
व महाराष्ट्र के कुछ भाग ।
और अंत मे फिल्म का ओवेरसीज मार्कट
आता है जिसके अंतर्गत विदेशो मे फिल्म रिलीज़ की जाती है ।
फिल्म वितरक के कार्य
v फिल्म की रिलीज दिनांक तय करना ।
v फिल्म का प्रमोशन करना ।
v फिल्म के प्रचार प्रसार के लिए विज्ञापन
कंपनी हायर करना ।
v न्यूज़ पेपर, टी॰ बी तथा रेडियो पर विज्ञापन
देना ।
v फिल्म के पोस्टर बनबाना ।
निर्माता तथा वितरक के बीच व्यापार का स्वारूप
निर्माता तथा वितरक के बीच व्यापार दो तरह से होता
है ।
1 एक मुश्त राशि देकर फिल्म खरीद लेना – सबसे पहले वितरक फिल्म देख कर निर्माता को
यह बताता है की फिल्म सिनेमा घर मे दर्शक खींचने मे कितनी सक्षम है यदि फिल्म मे
दम होती है तो वितरक एक मुश्त रकम देकर फिल्म खरीद लेता है जिसकी आधी राशि बह
एडवांस देता है शेष राशि एक निश्चित समय बाद निर्माता को चुका देता है अब फिल्म के
लाभ हानी पर पूरा अधिकार वितरक का हो जाता है यदि फिल्म बड़ी हिट हो जाती है तो
वितरक अत्याधिक लाभ कमाता है ।
2 मिनिमम गौरंटी – इस प्रक्रिया के अंतर्गत सबसे पहले वितरक
अपना लगाया हुआ पैसा निकलता है फिर लाभ
का 40
प्रातिशत अपने पास रखता है और 40 प्रातिशत निर्माता को देता है ।
वितरक तथा प्रादर्शक
फिल्म वितरक प्रादर्शकों के माध्यम से फिल्म को
सिनेमा घरो मे प्रादर्शित करबाते है। बहुत से सिनेमा घर के मालिक अपने दम पर फिल्म
खरीद कर चलाते है और बहुत से सिनेमा घर के मालिक वितरक से टाईअप करके
लाभ-हानी के तय सहमति पत्र के अनुसार
फिल्म चलाते है
जिन सिनेमा घरो मे आधुनिक
सेटेलाइट सिस्टम की सुबिधा होती है उनमे वितरक सेटेलाइट के माध्यम सीधे फिल्म
उपलब्ध करा देता है । एंव जिन सिनेमा घरो
मे परम्परागत तरीके से प्रॉजेक्टर मशीन से फिल्मे चलाई जाती है उनमे वितरक फिल्म
की रील भेजबा देता है ।
देश विदेश की प्रमुख वितरण
कंपनीया
EROS
INTERNATIONAL, REELIANCE, UTV, PARCEPT PICTURE COMPANY, PHANTAM FILMS, EXTEL
ENTERTAINMENT यह प्रमुख भारतीय वितरण कंपनी है ।
VARNER BROTHERS,
FOX STAR STUDIO, TIPING POINT आदि प्रमुख विदेशी फिल्म वितरण कंपनी है । इसके साथ ही UFO प्रमुख कंपनी है जो सिर्फ सेटे लाइट के
माध्यम से फिल्म वितरित करती है ।
निष्कर्ष
उपर्युक्त विवेचना के आधार पर स्पष्ट होता है की इसमे
कोई संदेह नहीं है की फिल्म निर्माण एक कठिन कार्य है लेकिन उससे भी बड़ा कठिन
कार्य फिल्मों को सिनेमा घर तक पाहुचाना है । फिल्मों का इतिहास साक्षी है की कई
फिल्मे वितरक न मिलने के कारण काल के गाल मे समा गई, फिल्म की सफलता मे वितरण का विशेष
योगदान होता है इसलिए प्रत्येक निर्माता को वितरण की उचित योजना बनानी चाहिय ताकि
फिल्म को सफलता पूर्वक दर्शको तक पहुचाया
जा सके ।
संदर्भ सूची :-
1 संचार के सात सोपान, डॉ अनिल के॰ राम
2 कक्षा व्यखान, डॉ सुरेश शर्मा
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