नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन विभाग सभी छत्रों
हेतु ।
कार्येशाला संबन्धित ज्ञान प्राप्ती विषय में-
ड़ा॰ वि
घरसे समय पर न आने केकारणमेंइनकिकार्येशालामेंअनुपस्थितथा।
श्री के॰ आर॰ उपेन्द्र-
इन्होंने ने मैंगलोर से आकर एडवांस अभिनय को लेकर
कार्येशाला लगाई और मेंने इन से बहुत सी अभिनय तकनीकियों के बारे में सीखा और बहुत
सी इन्होंने मुझे अर्थात सम्मिलित छात्रों को अभिनय से संबन्धित व्यायाम सीखाये और
में इन सभी का प्रयोग अपने अभिनय को सुधारनेमें करूंगा इन्होने ने अभिनय संबन्धित
प्रयोग प्रक्रिया भी करायी अर्थात एक छोटे से रामायण के लेख को उठा करइन्होने हमे
जो सिखाया उसे प्रयोगात्मक भी कर के दिखाया। इन्होने रसो के बारे में भी बताया
अत: मुझे इन का काम बहुत अच्छा लगाऔर मेँ इन सभी प्रयोगो को
अपने निर्देशन,अभिनय आदि मेँ करूंगा और मै आशा करता हूँ कि ये आगे भी हमे
ज्ञान देने आए ।
श्री प्रवीण भोले ( पुणे )-
इनकी कार्येशाला मुख्यते एम॰ ए॰ प्रथम छमाही और बीवोक के
छत्रों के लिए थी और मेँ फिर भी शामिल हुआ परंतु हमें निरजा पटवर्धन जी की
कार्येशाला शुरू होने के कारण वहाँ से जाना पढ़ा था तो मुझे दुख हुआ। अर्थात जब तक
था तो मेंने इन से अभिनय सिद्वांत और शैलियाँ का अध्ययन किया और इसे अध्ययन कर मेरी
दोहरायी हो गई और कुछ उलझनथी तो मस्तिश मेँ उसे ले कर सफाई हुई ।
अत;अभिनय सिद्वांत और शैलियाँ में
निम्नलिखित के बारे में अध्ययन किया :-
ओसाइरस एक राजा था तो वह आचनक शड़यन्त्र द्वारा मार दिया गया और प्रजा ने
उसे मरा हुआ समझ दफन कर दिया और खाने का समान भी उसके साथ रख दिया क्योंकि वह की
प्रथा थी और वह रोने लगे और ओसाइरस मरा नहीं था वो जख्मी हुआ था पर हकीम ने उसे
मरा हुआ घोषित कर दिया था वह खाने का सारा समान खा गए और धीमे धीमे उठने लगे तो तभी
से एक जलूस सा निकाल सभी लोग वहाँ के राजा ओसाइरस को वापस लाये महल में खुशी के
गीत गाते हुये परंतु कुछ साल बाद ओसाइरस मर गए और फिर उस प्रथा को जारी रखा उन्हे दफनाने
के बाद एक बचे को रथ पर बैठा के खुशी के गीत गा कर लाया जाता हे हर साल अर्थात एक
जलूस सा निकाला जाता है उसी सैम तारीख को ओसाइरस की याद में । वह जो गाँन होता है
उसे Dhithiram कहते है
और उमे अनुवाद करने का पहेला काम किया वो Thespis नाम का
व्यक्ती था क्योंकि मंत्र पढ़ते तो वहाँ की जनता को समझ नहीं आता था ।
1. Dhithiram - समूह में गाते बाजते मंत्र गान
2. Thespis- गाना narration गाना
3. Aeschilus – ग्रीक लोग मुकुट लगा के आते थे
इस प्रक्रिया को कहतेइसकिल्स ।
4. Theatron
5. Mediyate Theatre - एक समय था तो उस समय में
जिसस आय और उनकी मृत्यु कर दी गई और उनके सात चेले थे तो उनके समय भी नाटक होते थे
पर जिसस की मृत्यु के पश्चात उनके चेलो ने सारे यूरोप में भाई चारे को बढ़वा दिया
क्योंकि जिसस भी भाई चारे, अमन, चैनऔर शांती
को बढ़वा देते थे और नाटक बंद करवा दिये क्योंकि उसमे sexuality और fight दिखायी जाती थी। इन सात चेलो ने रविवार को कोई
काम न करे कहे कर उस दिन जिसस की church में कहानियाँ सुनानी शुरू
कर दी और रविवार को अवकाश घोषित कर दिया ( इसी दिन से पूरे संसार में रविवार का
अवकाश चला आ रहा है ) और लोग इस दोरान कहानियाँ सुन बोर होने लगे तो उन्होने इन
कहानियों मंच कर नाटक रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया और कलाकारों के लिए नोटंकी
वालों को जो सड़क पर नाटक करते थे उनको कुछ पैसे दे बुलाना शुरू कर दिया और वो भी
खुश हो जाते थे और church में नाटकीए रूप में जिसस की कहानियो
को बताते तो इससे लोगो का मनोरंजन भी हो जाता था और फिर उन्होने सभी जगह चलते फिरते
इन नाटको करना शुरू करवा दिया तो वह wheels का चलने वाला मंच बनाया और
सभी जगह घूम घूम करना शुरू कर दिया तो इस प्रकार के थियेटर को Mediate
theatreकहते थे।
कमेडिया डेल आर्ते – इटली में इस प्रकार का थियेटर होता था
और 14वीं से 16वींशताब्दी तक इस प्रकार के थियेटर का समय था ये थियेटर कामेडी पर आधारित
था इसमे artist
को बहार से नोटंकी वालो को बुला के लाया जाता था।इस प्रकार के
थियेटर में कोई लिखित संवाद नहीं होते थे संवाद सब मोखिक होते थे।
आर्टिस्ट – आर्टिस्ट
वह होता था जिसे मंच पर जरूरत के हिसाब से बुलाया जाता था जैसे दादा के मरनेका दृश्ये
बनाना है तो इन्हे अपनी ही भाव भंगिमाओ से दादा के मरने फोटो बनाने के लिए कहते थे
और वह इन्हे कुछ पैसा दे देते थे और वह खुश हो जाते थे क्योंकि इन लोगो के पास कुछ
काम नहीं होता था वह घूम घूम कर नोटंकी करते थे।
Stock character –ये तीन प्रकार के होते थे जो निम्नलिखित है:-
1. Old-(i). Pantalone (ये एक बूढ़ा
चरित्र होता था, पत्लून शब्द यही से निकला जो हम पेन्ट को
लेकर इस्तेमाल करते है ) (ii)Dottore-( ये बच्चे का
चरित्र होता था और बच्चे के ही रटे रटाये संवाद मिलते थे ) (iii)
Capitano – ये एक मिलिटरी का चरित्र होता
था।
2. Young Heroes 3. Servants
Life semi Mask and Hubs mask- Hubs mask का अर्थ जो आँखों, माथे, नाक
को कवर करता था।
जर्मनी में रंग मंच की शुरुआत-
1469 में Johan Gutlenbera ने अपने यहाँ भी नाटको के
मंच की इच्छा जताई और अपनी एक टोली को ग्रीक भेजा जिस पर ग्रीक से ही रोमन ने कापी
कर नाटक खेलना शुरू किया था पर रोमन लोगों को उनकी भाषा समझ नहीं आने पर सेक्स और लढ़ायी
वाले नाटक दिखाना शुरू किया था और इन्ही पर नाटक लिखना और खेलना शुरू किया था ।
जर्मनी के लोगो को ग्रीक नाटको की लिपि समझ नहीं आ रही थी तो उन्होने अपनी लिपि से
मिलती जुलती लिपि वाले रोमन देश के नाटकों को देख नाटक खेलने और उन्ही को पढ़ नाटक
लिखना शुरू कर दिया और वह पत्थर की stamp बनाते और नाटको की printing
करते थे।
Elizabeth Theatre-
यही से शेक्सपीर का थियेटर शुरू हुआ और इस समय का थियेटर
ट्रैजिडि, कामेडी,
पर आधारित था जिसके मुख्य नाटक थे – हैमलेट, किंग लियर, औथेलो,रोमियो जूलियत आदि। कामेडी के नाटक थे- टेमिंग
औफ़ दी शूस,मर्चेन्ट औफ़ दी वेलीस,टावेटा
नाइयीटआदि ।
19वी शताब्दी –
1850 से 1875 तक के कार्ये काल में Ougust Camptain आया और उसने Mepolian
को खत्त्म कर दिया और समाज को ध्यान में रखते हुये निरीक्षण को शुरू
कर दिया यही से Theory of Darvin और Industrial Revolution
शुरू हुई।
शेक्सपीर के थियेटर बाद परी, चुढ़ेल आदि की कहानियाँ आई फिर निरीक्षण को ध्यान में रख कर बंद कर दिया गया
ये सब और फिर realistic लिखे जाने लगे।
Realistic play writers :-
1. Henry Ibson इनकेनाटक
थे :-
(i)
दा डोलस हाउस
(ii)
येनिमाई ऑफ
दी पीपल
(iii)
डा वाइल्ड
डक्क
(iv)
पिल्लर ऑफ
सोसाइटी
(v)
घोस्ट
2. Jeorge Show (England )इनके नाटक थे :-
(i) पिग्मलीओन
(ii) आर्म्स एंड मैन ।
3. Augstt Steamberg
(Swiden ) इनके नाटक थे :-
(i)
फादर मिस
जूलिया
उस समय
सन 1880 जर्मनी के राजा भी नाटक देखने जाते थे जिनका नाम Duke Of Saxe Meiningen था और उन्होंने कहा कैसे
बेड़ंगे से नाटक होते है और इन सबको ध्यान
में रखते हुये अच्छे नाटक कर ने के लिए अपनी Meiningen Society of Theatre बनाई और पूरी कास्ट्यूमे के साथ 60 दिन Run throughउनके
ग्रूप में चलता था। इन्होंने अपनी अभिनय शैली भी बनाई जिसे फेसिया और गेस्चर कहते है
।
Liberal Theatre Movement – सन 1890 में Liberal
Theatre Movement शुरू हुआ Amilzoloकानाटक Andre
Antoine द्वारा किया गया। Liberal Theatre Movement इब्बसन के नाटक करते थे। फिर Andre Antoine कोयले की
खान में गए उन्होने वहाँ पे 6 महीने तक नोकरी की और फिर मजदूरों की हालत पर लिखा
Masco
Art Theatre की शुरुआत हुई Konstensis
Elexsisvit ने इसकी शुरुआत की जिनका real नाम Konstensis Stanislavaski जो Russia
में Masco के थे वह परिवारिक रूप से बहुत धनी
थे और जाइंट फॅमिली में रहेते थे इनके परिवार में काफी लोग थे जो संयुक्त रूप से रहते
थे और वह अपने पिता जी से छुप-छुप के थियेटर करते थेतो एक बार उनके पिता जी को पता
चल गया और उनसे पूछा तो उनके पिता जी बोले यदि थियेटर ही करना है बढ़े लेवल पर
व्यवसायीक तोर पर करो पर वह कुछ नहीं बोले और एक बार इन्हे 65 साल के बूढ़े का
चरित्र अदा करना था जो अकेला रहेता था खुसढ़ थाकिसीसे नहीं बात चीत करता था और
लोगों के निकट आने पर क्रोधित हो जाता था,सब से घृणा करता थाऔर
ये इनके लिए बहुत मुश्किल था क्योंकि ये हमेशा से सभी के बीच में रहते थेऔर
प्रसन्न रहते थे और परिवारिक रूप से धनी थेपर इनके गुरु ने कहा की एक बूढ़े का
चरित्र ही तो है थोढ़ी सीकमर झुकनी है और सवांद लड़खढ़ाते हुये बोलने है बस हो गया तो इन्होने ने
कहा नहीं तो ये उस रात घर नहीं गए घर के पास रीहेएरसल के बाद सीधे एक पुराने किले
में चले गए और वहाँ उन्होने actor और characterदोनों का ध्यान किया वह पूरी रात उसी किले में एक कोने में बेठे रहे और ध्यान
करते रहे ।
Masco Art Theatre -Masco Art Theatreकी शुरुआत 1897 में हुयी Mularecvich
Narelvich Dhanchenko जो Writer, Actor, Directorथे एक बार Konstensis Stanislavaski से अचानकएक Bar मिले और वह
जानते थे की वह थियेटर करते हैउन्होने ने वहाँ बेठ कर बातचीत की और 24 घण्टे तक बेठे रहे दुकान बन्द होने पर भी बेठे रहे और अगले दिन दुकान दार
वापिस आया तो वैसे ही उसे वही बातचीत करते हुये मिले तो दोनों ने मिल के Masco Art Theatre बनाया।
Konstensis
Stanislavaskiने एक किताब लिखी जो Russian भाषा में थी जो की “Actor work on
himself for his role “ पर अधारित थी और Elizabethan Roynold
Hopgood ने दो भागो में Translate की थी जिसका
पहला भाग था Actor Propere और दूसरा भाग था Building
a character ।
Method
of Acting पर Konstensis Stanislavaski ने
निम्नलिखित चरणों को बताया :-
1॰ Training – Body and Voice
2. Stage
Technique
3.
Given Circustances
4.
“If”
5.
Emotional Memory
6.
Unit and Objective
7.
Through Line
U,S.A में भी इन सातों का प्रयोग होने लगा और
Konstensis Stanislavaskiके शिष्य थे USA के प्रसिद्ध Lee strassberg इन्होंने “The
Method “ के नाम से एकटर
स्टुडियो खोला और इन्होंने Konstensis Stanislavaski के इन
ऊपरी सात में से सिर्फ Training – Body and Voic, Stage Technique,Unit and
Objectiveको नकारा।
Vsevolod Mayorhold-ये 1977 में आए और इन्होंने निम्नलिखित पर ज़ोर दिया :-
1.
Theatricality
2.
Constructivisim
3.
Biomechanics
Taylorism - इन्होंने
ने Taylorism पर ज़ोर दिया जिसका
अर्थ है समूहिक वर्क (work of collectively )अर्थात यदि अभिनेता 10 की पंक्ती में खढ़े हुये है तो पहले
वाले ने 10वें नम्बर पर खढ़े व्यक्ती को थपढ़ मारना है तो वह वह दूसरे वाले को मरेगा
और दूसरा तीसरे को और तीसरा चौथे वाले को इस प्रकार नोवा वाला 10वें वाले को अत: इसे
कहते हैTaylorism (work of collectively) ।
दोनों के बीच में अंतर:-
Konstensis Stanislavaski Vsevolod
Mayorhold
1.
Realistic 1.
Thearical
2.
Psycological inside to 2. Psychological out-
outside side to inside.
उदाहरण के लिए :-
James Lang कहते
थे react body first and reaction after.
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