“तकनीकी विकास ने फिल्म
निर्माण का पूरा परिदृश्य बदल दिया है” –
सिनेमा के 100 साल – तकनीक बनाम
प्रतिभा –
सिनेमा ने अपने 100 साल के सफर में तरह
तरह के उतार चढ़ाव देखे हैं । समय
समय पर अलग अलग तरह के प्रयोग
हुए
और एक से एक लाजवाब फिल्मे बनी जिन्होंने लोगों पर अपनी आमित छाप छोड़ि । देवदास ,बंदिनी, मदर इंडिया
,मुग़ल-ए-आज़म,गाइड, हम दोनों ,गंगा जमुना ,और नया
दौर से लेकर आनंद ,जंजीर, और शोले जैसी फिल्में
आज भी
अपने गीत,संगीत, संवाद,अभिनय, सशकत निर्देशन के लिए जानी
जाती
हैं। 20-25 वर्ष के गोल्डेन एरा
को कौन भूल सकता है । बीच में एक दौर समानान्तर फिल्मों का भी आया
जिसमे जीवन के यथार्थ से जुड़ी कई फिल्में बहुत सफल रही।
नई-2तकनीक के विकास के
साथ ही साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्रमें भी उनका
प्रयोग होने लगा और आज आलम यह है की तकनीक का ही बोल बाला है। फिल्म निर्माण की काला को आज के दौर की सबसे अधिक लोकप्रिए,सशक्त और आकर्षक काला के रूप में जाना जाता है। यह काला
जितनी आकर्षक है उतनी ही जटिल भी । आज का दौर तकनीक का दौर है इसलिय युवा वर्ग का उन तकनीकों की तरफ आकर्षित होना एक
हद तक स्वाभाविक भी है। Computer,
internet , animation, visual effects जैसी तकनीक
ने लोगों की दुनियाँ ही बदल दी है ।
इन सारी वैज्ञानिक विधाओं का सीधा टकराव आज मनुष्य
की
नयसर्गिक प्रतिभाओं से
है। कोई भी तकनीक अगर मनुष्य के
स्वाभाविक गुणो और प्रतिभाओं को प्रभावित करती है तो वो आगे चल कर बहुत अधिक सफल नहीं हो पाती,ऐसे में
एक संतुलन आवश्यक है। मुझे एक शेर याद आ रही है जो Computer की
एजाद और उसकी उपयोगिता के साथ साथ उसके प्रति ज़रूरत से जादा बढ़ते आकर्षण को नज़र मे
रखते हुए है
“कामप्यूटरों ने लोगों के यादाश छीन ली,
लो देखते ही देखते
ये भी हुनर गया “
काफी हद तक सच्चाई को उजागर करता है यह शेर । एक ज़माना था जब समाज
में हर तरह के हुनर की कदर थी । दुनिया हुनरमंदों की घायल हुआ करती थी। बदलते दौर में लोगों के बीच किसी भी हुनर के
प्रति कम होते आकर्षण ने यह कहेने पर मजबूर कर दियाकि
“सबसे बड़ा हुनर है कि,कोई हुनर
नहीं“
कोई भी कला सिर्फ तकनीक कि उन्नति के
सहारे ऊँचाइयों को नहींछु सकती यही कारण है कि आज के दौर में केवल तकनीक के सहारे
बनने वाली अधिकांश फिल्में असफल हो
जाती हैं और कुछ
व्यापार में आसमान छु
जाती है,वो देखने वालो के अंतर मन को नहीं छु पाती,उन्हे आकर्षित नहीं कर पाती
तो कुछ
कर पाती है ।
बॉलीवुड फिल्मों में तकनीकी की शुरुआत –
तकनीकी (साईंस फिक्श्न) फिल्मों की
शुरुआत भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में 20वीं शताब्दी के बीच में ही हो गई थी । 1952
के शुरू में ही फिल्म “खाड़ू“बनाई गई
जो “तमिल और अमेरिका” का सह प्रोडक्शन (Co- Production ) था। “ दा एलियन “दूसरी
तकनीकी वाली साईंस
फिक्श्न फिल्म थी जो सन 1960 के अन्त में बनने जा रही थी परन्तु
बाद में रद हो गई यह फिल्म भारतीय बेंगाली
निर्देशक स्वर्गीय श्री सत्यजीत राय जी द्वारा निर्देशित थी और इसके निर्माता थे होलीवूड स्टुडियो Columbia Pictures।
भारत का सफर 1952 की फिल्म “खाड़ू“ से लेकर आज तक की अंतिम फिल्म जो तकनीकी से भरपूर हैजो इसी वर्ष(2015) रिलीस
हुई
है जिसमें लीड रोल निभाया है विष्णु विशाल,मिया, करुनाकरण ने,वह हैनए निर्देशक रवि कुमारआर॰ की
फिल्म “इन्दु नेतरू नालाई”(Indru Netru Naalai)यह एक तमिल फिल्म है जिसके
संगीतकार है हिफोप तामिजा और लिरिक्स है विवेक, मुथामिल और
हिफोप तामिजा के । इस फिल्म में एक वैज्ञानिक होते है जिसका किरदार श्री आर्या जी ने
निभाया है जो एक टाईम मशीन की खोज करते है और जो टाईम मशीन भूतकाल में भेज
देती है और भूतकाल के सफर कराती है। हलांकी अभी और भी
फिल्में बनेगी और इसे भारत की तकनीकी से भरपूर अंतिम
फिल्म नहीं कहा जा सकता हैऔर ऐसा
कहना अनुचित होगा । यह फिल्में आने वाली तकनीकी फिल्मों को एक आयीडिया
दे रही है ।
1987 में फिर तकनीकी
से भरपूर उस समय की Science
Fiction फिल्म जो सुपर हिट हुई वह थी Mr. India वह पूरी
तरह से बालीवूड की थी । Mr.India ने दर्शकों
के बीच में तकनीकी के एक आइडिया को प्रस्तुत किया।
Mr. India के
बाद तकनीकी से भरपूर कई फिल्में आई जो निम्नलिखित है :-
नालाया मानिथान
|
तमिल
|
1989
|
तूफान
|
हिन्दी
|
1989
|
अधिसाया मनिथान
|
तमिल
|
1990
|
आदितया
|
तेलगु
|
1991
|
लाल
परी
|
हिन्दी
|
1991
|
हालीवूड
|
कन्नड़
|
2002
|
पाताल
घर
|
बेंगाली
|
2003
|
फन टू
शी
|
हिन्दी
|
2003
|
कोई
मिल गया
|
हिन्दी
|
2003
|
|
|
|
|
2003 में आई तकनीकी से भरपूर फिल्म जो सुपर
डुपर हिट हुई “कोई मिल गया” ने सफलता की बुलंदियों को छु लिया और फिर “कृष”
फिल्म की सीरीज ने जो तकनीकी से भरपूर
हैभारत की पहली साईंटि
फीक/सुपर हीरो फिल्म मानी जाती हैजिसकी तीन सीरीज
अब तक बन चुकी है कृष-1, कृष-2,कृष-3 ।
इसके बाद आई 2010 में तमिल
फिल्म “Endhiran“ जिसमें मुख्य भूमिका निभाई अभिनेता श्री रजनी कान्त जी ने और
अभिनेत्री श्रीमती ऐश्वर्या राय बच्चन
जी ने
जो भारत की बहुत ही महेंगी फिल्म(Most expensive) थी जिसमें तकनीकी का प्रयोग भरपूर देखने को मिलेगा जो सुपर हिट हुई थी।
तकनीकी से भरपुर जो फिल्में
आई उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित है :-
|
न्यू
(New )
|
2004
|
तमिल
|
|
रुद्राक्ष
|
2004
|
हिन्दी
|
|
तारजन:
दा वंडर कार
|
2004
|
हिन्दी
|
|
आलाक
|
2006
|
हिन्दी
|
|
जाने
होगा क्या
|
2006
|
हिन्दी
|
|
कृष
|
2006
|
हिन्दी
|
|
भारथन
इफेक्ट
|
2007
|
मलयालम
|
|
जबर्दस्त
|
2007
|
मराठी
|
|
अथिसायन
|
2007
|
मलयालम
|
|
लव स्टोरी
2050
|
2008
|
हिन्दी
|
|
दसव्थारम
|
2008
|
तमिल
|
|
द्रोणा
|
2008
|
हिन्दी
|
|
फ्रेंड
|
2009
|
बेंगाली
|
|
आ देखें
ज़रा
|
2009
|
हिन्दी
|
|
एंथीरन
|
2010
|
तमिल
|
|
एक्शन रिपल्ये
|
2010
|
हिन्दी
|
|
ज़ोम अरीवू
|
2011
|
तमिल
|
|
रा॰ वन
|
2011
|
हिन्दी
|
|
अमबुली
|
2012
|
तमिल
|
|
जोकर
|
2012
|
हिन्दी
|
|
वायेरस दीवान
|
2013
|
हिन्दी
|
|
खो-खो
|
2013
|
मराठी
|
|
झपट्लेला 2
|
2013
|
मराठी
|
|
2013
|
बेंगाली
|
|
|
कृष–3
|
2013
|
हिन्दी
|
|
ईरान दाम
उलागम
|
2013
|
तमिल
|
|
क्रेचर 3डी
|
2014
|
हिन्दी
|
|
चाँद 2013
|
2014
|
हिन्दी
|
|
अप्पुची ग्रामम
|
2014
|
तमिल
|
|
पी के
|
2014
|
हिन्दी
|
|
आई
|
2015
|
तमिल
|
|
मिस्टर एक्स
|
2015
|
हिन्दी
|
|
इंडरू नेतरु लालाई
|
2015
|
तमिल
|
|
पानी
|
आने वाली
|
हिन्दी
|
|
उनमत
|
आने वाली
|
हिन्दी/इंगलिश
|
|
दागा
|
आने वाली
|
मराठी/हिन्दी
|
इसके अलावा फिल्मों का परिदृश्य बदलने के लिए बहुत सी टेक्नोलोजी/तकनीकियाँ को
खोजा गया जिसके सहारे से फिल्मों का परिदृश्य
बदला जा रहा है ही जिनमें से कुछ निम्नलिखित
है :-
1॰ लोकेशन–
आज के
समय में लोकेशन पर जाए बिना ही दृश्य को शूट कर लिया जाता है जिस तकनीकी से दृश्य को वही बेठे शूट किया जाता है उस तकनीकी का नाम है क्रोमा
शूट ।
क्रोमा
शूट–
उदाहरण के लिए यदि लालकिले में शूट करना है तोआज के समय में वहाँ जाने की जरूरत नहीं होती है स्टुडियो
में बेठे-बेठे ही उस दृश्य को फिल्माया जा सकता
है इसके लिए बस जरूरत होती है तो खाली लालकिले को शूट
करने की लाल किले के हर कोने-कोने को केमरे में रिकॉर्ड
करने कीऔर इसमें बस कुछ बातों को ध्यान
रखा जाता है कि लालकिले में जिस किसी भी
अभिनेता या अभिनेत्री का दृश्य है तो उसे लाल या हरे रंग के कपड़े
नहीं पहने होंगे और यदि वह लाल या हरे रंग के कपड़े पहने के क्रोमा कट के सामने
अभिनय करता या करती है तो फिर सारा दृश्य खराब हो जाएगा और जो इफेक्ट निर्देशक को
चाहिए वह नहीं मिल पाएगा।
क्रोमा शूट करने से वही दृश्य
का इफेक्ट आता है जो हुबा हू ऐसा लगता है वहाँ फिल्माया
गया हो वह तकनीकी दृष्टी से एक दम समान लगता है और कोई भी दर्शक यह नहीं पहचान
सकता कि वह लाल किले में जा कर शूट
नहीं किया गया ।
इस तकनीकी से समय तो बचता ही है और साथ-साथ
धन की भी बचत होती है और किसी अभिनेता या अभिनेत्री की डेट्स किसी अन्य फिल्म के निर्देशक के साथ
होती है तो इससे उन्हे भी समय को मनेज करने में सहायता मिलती है ।
2.केमरा
तकनीकी –
केमरा आज के समय में फिल्मों का परिदृश्य
बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और वह देखने में भी आता है केमरे का भरपुर तकनीकी रूप से इस्तेमाल कई
फिल्मों में मिला जिनमें से फिल्म कृष-1,
कृष-2,कृष-3 तीनों फिल्मों में देखने को मिलता है “कृष-2”में वहाँ देखने को मिलाता है जब
श्री रितिक रोशन जी पानी की धार के साथ ऊंची छ्लांग लगाते है और उड़ने जैसे लगते है
इसी प्रकारइस फिल्म में कईअदभूत शॉट केमरे की मदद से लिए गए थे और फिल्म“पी॰क॰” में भी केमरे का भर पुर तकनीकी रूप से
इस्तेमाल देखने को मिलता है जहां श्री आमीर खान जी अन्तरिक्ष से उड़न तश्तरी
से उतरते है और इसके इलावा बहुत सी जगह पर मिलता
है।
इसके
इलावा “मटरू
की बिजली का मन डोला’ में भारत में पहली बार Arriraw शॉट लेने के लिए ARRI ALEXA cameras का प्रयोग किया गया। इस फिल्म में मेजर शॉट इस केमरे
के द्वारा लिए गए थे और यह फिल्म श्री विशाल भारद्वाज जी के द्वारा
निर्देशित की गई थी और इसके Cinematographer थे श्री
कार्तिक विजय जी। इन्होने
ने कई Experiment इस
केमरे के साथ किएथे ।
इन्होने इस केमरे को Anand Cine Services जो चेनई में है से किराय पर लिया था और इस केमरे में इन्होंने इस
केमरे में ARRI Master
Primes lenses का प्रयोग किया और यह बहुत ही अधिक फास्ट लेन्स
थे। यह फिल्म 70% अंधेरे में शूट की गई थी और यह केमरा इन्हे Shadow को Balance करने में बहुत काम आया ।

Major Bollywood movie shot using ARRIRAW—ARRIALEXAcameras


3.वी॰एफ॰एक्स॰
(VFX EFFECTS)–
वी॰ एफ॰ एक्स॰ एक बहुत ही Advance technology है जिसकी फुल फोरम है Visual effects । इन दिनों ये बहुत
ही इस्तेमाल की जा रही है ऐसे scenes को करने में यह ज्यादा
इस्तेमाल की जा रही है जो बहुत ही dangerous होते है जो करने मेंखतरे से खाली नहीं होते है
परन्तु वी॰एफ॰एक्स॰ ऐसी technology है
जो आसानी से उसे real में किया हुआ बना देती है परन्तु यह बहुत ही
खर्चीली है और इसमें हाल ही में और भी नये fetures डाले जा रहे है । कुछ निम्नलिखित
फिल्में है जिनमें यह इस्तेमाल की गई है:-
चेनयी एक्स्प्रेस्स
(ChennaiExpress)

1. संपादन(Edditing)-
संपादन भी एक तकनीक है जिसने फिल्मों का परिदृश बदलने में काफी
सहयता प्रदान की है। आज अन्य तकनीकियों के साथ-साथ संपादन का भी सहारा लिया जा रहा
है दर्शकों को सिनेमा घर तक पहुँचानेके
लिए अर्थात भारतीय सिनेमा को एक नया दर्जा, पहेचान देने के लिए संपादन का भी सहारा लिया जा रहा है ।
मोनटाज (Montage)-
जब छोटे छोटे
शॉर्टस को आपस में जोड़ा जाता है
तो उसे मोनटाज कहते है ।
संपादन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरीय आप अभिनेय की गलतीयों को छुपा
सकते है और शॉट को और बहेतर दिखा सकते है संपादन में eye line matching,
continuityआदि
का ध्यान रखा जाता है और यही अभिनय की गलतीयों को सुधारने का मोका देती है अगर कोई
अभिनेता आसमान से खुदता है तो वह खुदता नहीं है उसे ऐसा करते हुये संपादन तकनीक के जरिए से ही दिखाया जाता है और VFX effects के जरिए
से और दर्शक एसे दृश्यों को देखने में अधिक रुचि लेते है और real समझते है जबकि सत्य केवल एक शोध करताया
फिल्म जगत के लोग ही जानते है और जो इंटरनेट को चलाते है जानने की रुचि रखते वह ही इस सत्य से रूबरू हो पाते है ।
संपादन में मोटाज़ के
अलावा यह भी निम्नलिखित इफ़ेक्ट्स है जो फिल्मों का परिदृश्य बदलने में सहायता कर
रहे है:-
·
("Split edit")
. Dreamsequences
5.आवाज (Sound)
आवज
ने भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है फिल्मों का परिदृश बदलने में यह भी बहुत
ही महत्वपूर्ण तकनीक है जो आज बहुत ही इस्तेमाल में ली जा रही है आज वी॰ एफ॰ एक्स॰
के साथ-साथ यह तकनीक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
फोली
आर्टिस्ट (Folley artist )भी आज इस
तकनीकी से फिल्मों का परिदृश्य बदलने में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है । फोली आर्टिस्ट वह होता है जो निर्देशक की मांग पर तरह-तरह की
आवाज़े निकालने में सक्षम होता है और संपादन के जरिये उसके द्वारा निकाली गई आवाजों को संपादक द्वारा
बड़ी होशियारी से जोड़ दिया जाता है।फोली कलाकार तरह-तरह की आवाजों को रिकॉर्डिंग के माध्यम से एकत्रित भी करता रहता
है और जब किसी ध्वनी की मांग आती है तो वह उसे मांग के हिसाब से दे देता है।
6.संगीत (Music)
संगीत ने भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका
निभाई है फिल्मों का परिदृश बदलने में यह भी बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीक है जो आज
बहुत ही इस्तेमाल में ली जा रही हैसंगीत के बिना हमारी फिल्में आधुरी मानी जाती
है संगीत का अधिकतर प्रयोग गानो में देखने में मिलता है और गाने ही कभी कभी
फिल्मों की पटकथा (Screen play) कमजोर होने के कारण इसे
काम याब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
बेक ग्राउंड संगीत भी बहुत अधिक प्रयोग किया
जा रहा है संगीत कमजोर दृश्य को अच्छा बनाने का काम करता है बशर्ते उसकी एडिटिंग
अच्छी होनी चाहिए संगीत और संपादन से कई इफेक्टस दिये जाते है क्योंकि अच्छा
संपादन ही संगीत इफेक्ट को अच्छा बनाता है। अत: इसने तकनीकी बदलने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई है।
7. प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्र(रूप सज्जा(Litght and aesthetics)-
-
प्रकाश
व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्रने भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है फिल्मों का परिदृश बदलने
में यह भी बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीक है जो आज बहुत ही इस्तेमाल में ली जा रही है
प्रकाश
व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्रबहुत ही महत्वपूर्ण प्रयोग (इफैक्ट) निम्नलिखित फिल्मों
में देखने को मिलता है :-
1. सावरिया –
सावरिया जो श्री संजय लीला बंसाली जी की फिल्म
थी और इसमें एक गाने में नीले रंग का अधिक प्रयोग हुआ था इसमें प्रकाश व्यवस्था और
सौंदर्येशास्त्र दोनों ही नीले थे।
2. लीला –
लीला
फिल्म जो हाल ही में रिलीस हुई थी इसमें भी प्रकाश व्यवस्था और
सौंदर्येशास्त्र का एक गाने में अच्छा
इस्तेमाल किया गया जिसमें सुश्री सनी लीओन
जी ने अभिनय किया था।
3. प्रेम रत्न
धन पायो-
इस फिल्म में भी प्रेम रत्न धन पयोन में प्रकाश
व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्र का अच्छा प्रयोग किया गया है।
इसप्रकार बॉलीवूड में प्रकाश व्यवस्था और
सौंदर्येशास्त्र के ऊपर महेंगे से महेंगे बहुत से प्रयोग हो रहे है और तकनीकी में
लगतार समय के हिसाब से परिवर्तन आ रहा है।
प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्र(रूप सज्जा) (Litght and aesthetics)-
निम्नलिखित
कुछ प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्येशास्त्र (रूप सज्जा) घटक है
जिनके सहारे से तकनीकी में बदलाव लाया जा रहा है -
संदर्भसूची
–
॰क्लास
नोट्स –डा॰ रयाज़ हसन जी
॰
विकिपीडिया
यू. आर. एल. :-
बहुत अच्छा लेख है सर
ReplyDeleteआपका नम्बर मिल सकता है। आपसे सिनेमा से सम्बंधित बात करना है।