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महात्मागांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी
विश्वविद्यालय,वर्धा
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संगोष्ठी पत्र
नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन विभाग
प्रशन पत्र–प्रथम(गतिशील छवियाँ एवं ध्वनि का सिद्धांत)
विषय:- शाट कितने प्रकार के होते
है बेहतर शाट की विशेषताएँ बताइए। स्वाभाविक शाट के लिए फिल्म में किस तरह की
व्यवस्था की जानी चाहिए।
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शाट कितने प्रकार के होते है बेहतर शाट की विशेषताएँ बताइए।
स्वाभाविक शाट के लिए फिल्म में किस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए ?
शाट का अर्थ –
शाट फ्रेम की एक इकाई (Unit) होता है और कई फ्रेम मिलकर एक शाट बनता है । इसलिए फिल्म तथा दृश्य
के संदर्भ में शाट की चर्चा की जाती है न कि फ्रेम की।परंतु फ्रेम यदि अर्थहीन होगा तो शाट भी अर्थहीन होगा अप्रासांगिक होगा इसीलिए
शाट लेने के पहले निर्देशक और कैमरामैन फ्रेम की सज्जा तथा एक्शन पर ध्यान देते है। जो
फ्रेम में दिखलाई देता है वही शाट में दिखाई देगा । निर्देशक को शाट लेते समय काफी
सावधानी बरतनी चाहिए
क्योंकी कई शाट मिलाकर एक दृश्य (Scene) बनता
है।
शाट कितने प्रकार के होते है-
कैमरा तथा विषय(subject) एवंवस्तु (objects) के बीच की दूरियों के आधार पर शाट्स विभिन्न प्रकार के
होते है। दृश्य की आवश्यकता के अनुसार
निर्देशक तथा कैमरामैन दृश्य को कई शाट्स में बांटते है और
इस तरह बांटने में शाट्स की continutity
पर विशेष attention दिया जाता है। शाट्स के प्रकार निम्न है :-
1॰ एक्सट्रीम लाँग शाट(Extreme Long Shot)-
इस शाट का पहला उद्देश्य किसी स्थान
को स्थापित करना है जहों पर किसी दृश्य का action घटित होता है या कहानी की पृष्ठभूमि जिस स्थान
की हो। इसीलिय इस शाटस को स्थापना
शाट ( Establishing
shots ) भी कहते है। उदाहरण के लिए यदि किसी दृश्य
की पृष्ठभूमि विदेश है तो एक एक्सट्रीम लाँग शाट द्वारा दूर दूर तक फेले विदेशी शहर को ऊपर से दिखाते है
तो दर्शकों के मन में ये एक्सट्रीम लाँग शाट विदेश की छवी स्थापित कर देता है और बिना कुछ कहे दर्शक
समझ जाता है कि कहानी की पृष्ठभूमि यही है
जहां पूरी कहानी (दृश्य) घूमेगी ।
2. लाँग शॉट (Long Shot )-
लाँग शॉट किसी दृश्य या स्थान के एक्शन को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित
करता है एक्सट्रीम लाँग शॉट के विपरीत इसमें प्रत्येक व्यक्ती का एक्शन साफ रूप से देखा जा सकता है इसे दृश्य का स्थापना शाट भी कह
सकते है। इस शाट में वातावरण तथा क्षेत्र पर कम ध्यान रहता है व्यक्तीयों पर
अधिक ।
3॰ मिड लाँग शॉट (Mid Long Shot )-
इस शाट में चरित्र को सिर से घुटने तक ही दिखाया
जाता है
4. मिड शाट (Medium Shot or Mid Shot )
इस शाट में आस पास की
वस्तुओं तथा क्षेत्र को निकाल दिया जाता है। मौलिक
रूप से ये Body Shot होता है जिसमें शरीर को केंद्र बना दिया जाता है। इसके द्वारा
विभिन्न व्यक्तीयों और चरित्रों के बीच सम्बन्ध स्थापित किए जाते है परंतु इसमें Close-up Shot में दिखाई जाने वाली छोटी-छोटी भावनाओ की कमी होती है।
1.
क्लोज अप शाट (Close up Shot )-
क्लोज अप शाट का सबसे बढ़ा गुण ये है कि यह दर्शको को किसी
व्यक्ति या वस्तु के पास ले आता है। इस शाट में आसपास की अधिकतर वस्तुओं , वातावरण तथा पृष्ठभूमि को बाहर रखा जाता है यह शाट किसी दृश्य
में भावनाओ की अभिव्यक्ती, चरम सीमा (climax) का विकास तथा नाटकीयता उत्पन्न करने के लिए किए जाते है। इस
शाट में चरित्रों की feelings
तथा अनुभूति चेहरे पर दिखाई देती है। ये शाट
किसी भी शाट के बीच Editing
के समय लगाए जा सकते है।
6॰ मीडियम क्लोज शाट (Medium Close Shot )-
यह शाट बातचीत के समय में प्रयोग किए जाते है जिनका आकार (Magnification) सीने से सिर तक होता है। ये शाट भी किसी भी प्रकार के शाट
के साथ लगाए जा सकते है। Medium Close Shot से
क्लोज़ अप या लाँग शाट जोड़ने से दृश्य के प्रभाव में विभिन्नता लाई जा सकती है । यह
शाट बातचीत के समय में कंधो के पीछे से भी लिये जाते है। Medium Close से पास आने पर क्लोज़ अप बनता है।
7॰एक्सट्रीम क्लोजअप शाट (ExtremeClose up Shot )-
बहुत ही छोटी-छोटी
भावनाओं, अनुभूतियों तथा किसी विशेष नाटकीय प्रभाव लाने के लिए इस शाट का उपयोग होता है। इस तरह के शाट suspenseउत्त्पन्न करने के लिए भी किए जा सकते हैनिर्देशक छोटी छोटी वस्तुओं अथवा अंगों के एक्सट्रीम क्लोज अप
शाटलेकर उन्हें बढ़ा दिखा सकता है। Editor
इस प्रकार के शाट से नाटकीयता उत्त्पन्न कर सकता है जैसे हाथों की उँगलियों,अंगूठी,आँखें,होंठ आदि।
इस प्रकार के एक्सट्रीम
क्लोज अप शाट पर्दे पर अति गहरा प्रभाव उत्पन्न कर सकते है।
8. कट अवे शाटस (Cut away shots )-
कट अवे शाटस वह होते है जो दर्शकों को मुख्य दृश्य या एक्शन
से दूर ले जाएँ या उससे उनका ध्यान हटा दें लेकिन यह diversion बहुत कम समय के लिए होता है ये शाट मुख्य दृश्य या एक्शन का भाग नहीं होते।
जैसे दौड़ के समय भीड़ के शाट यदि भीड़ को दौड़ के बीच बीच में उचित स्थान पर दिखाया जाए तो वो
एक्शन काफी रुचिकर हो सकता है।
9. टोप एंगल शाट (Top Angle Shot )-
किसी चरित्र का लिया गया ये शाट उसके महत्व को कम करते हुए
उसे कमजोर या शक्तिहींन प्रदर्शित करता है। यदि वाइड एंगल लेंस से ये शाट लिया जाए तो प्राकृतिक दृश्य का अति नाटकीय प्रभाव उत्पन्न होता है।
10. लो एंगल शाट (LowAngle Shot )-
इस शाट में कमेरा विषय की दृष्टि सतह से नीचे की ओर रखा
जाता है। इसमें कमेरे को नीचे रखकर ऊपर की
ओर उठा दिया जाता है। इसमें दर्शक को ऊपर (Upward) दिखाई देने का आभास होता है । इसमे चरित्र का महत्व, प्रभाव व शक्ति बड़ी हुई प्रतीत होती है । इस प्रकार से
चरित्र अन्य की तुलना में प्रधान होता है।
11. पैनशाट (Pan Shot )-
कैमरे को बाई और घुमाने की स्थिति में लिया गया शाट पैन कहलाता है । पैन शाट का मुख्य उदेद्श्य
दर्शक को वस्तुओं की स्थितियों से अवगत
कराना होता है। इसके प्रकार इस प्रकार है :-
सर्वे पैन –
इस प्रकार के शाट दर्शक को घटित होनेवाले दृश्य स्थान से
परिचित कराते है।
ट्रैकिंग पैन(Tracking
pan ) –
इस शाट में कैमरा बाएँ दाएँ घूमते हुए किसी एक चलते हूए चरित्र,वस्तु, या एक्शन पर केन्द्रित हो जाता है । जैसे पैन करते हूए कैमरा चलती
हुई कार,घोडों की धोढ़,सड़क पर चलता हुआ व्यक्ति पर केन्द्रित हो जाए। इस
शाट की गति चलती हुई वस्तु के अनुसार
होनी चाहिएनहीं तो झटके दर्शको को नजर आएंगे ।
स्लो एवं व्हिप पैन ( Slow and Whip pan )-
पैन शाट की गति धीमी हो या तेज इसका निशचय सम्पूर्ण दृश्य की गति तथा उसके
उददेश्य के आधार पर करना चाहिए ।
बेहतर शाट की विशेषताएँ
एक्सट्रीम लाँग शाट (Extreme Long
Shot)-
1. इस शाट का पहला उद्देश्य किसी स्थान
को स्थापित करना है जहों पर किसी दृश्य का action घटित होता है या कहानी की पृष्ठभूमि जिस स्थान
की हो। इसीलिय इस शाट को स्थापना
शाट ( Establishing
shots ) भी कहते है ।
उदाहरण के लिए यदि किसी दृश्य
की पृष्ठभूमिविदेश है तो एक एक्सट्रीम लाँग शाट द्वारा दूर दूर तक फेले विदेशी शहर को ऊपर
से दिखाते है तो दर्शकों के मन में ये एक्सट्रीम लाँग शाट विदेश की छवी स्थापित कर देता है और बिना कुछ कहे दर्शक
समझ जाता है कि कहानी की पृष्ठभूमि यही
है जहां पूरी कहानी (दृश्य) घूमेगी ।
2. इसकि एक विशेषता ये है कि किसी दृश्य के घटना स्थल के दूर
दूर तक फेले हुए क्षेत्र को दर्शाने के लिए भी इस शाट का प्रयोग किया जाता है इस
प्रकार के शाट टॉप एंगल अथवा हेलीकाप्टर या किसी पर्वतीय चोटी से लिए जाते है ताकि
उस क्षेत्र का अधिक से अधिक क्षेत्र दिखाया जा सके। जैसे युद्ध भूमि या जुलूस जिसमें लाखों लोग भाग ले रहें हों। भीड़ का घनत्व भी इसी प्रकार बताया जा सकता है।
3. इसकि
एक विशेषता ये भी है कि यदि किसी व्यक्ति का अकेला पन्न दिखाना हो कि वह बिल्कुल अकेला है और उसका कोई नहीं है तो इस शाट का प्रयोग किया
जाता है ये शाट दर्शक को दार्शनिक धरातल पर ले जाकर उसे यह अहसास दिलाता है कि व्यक्ति बिल्लकुल अकेला है और इस संसार में उसका कोई महत्व नहीं है।
4॰ ये
शाट घटना स्थल के विस्तरीत स्थल को स्थापित करते है।
स्वाभाविक शाट के लिए फिल्म में व्यवस्था
1. शूटिंग शुरू होने के एक दिन पहले निर्देशक को यह निश्चित कर
लेना चाहिए कि उसे अगले दिन क्या शूट करना हैकिन-किन शाट को लेना है और इस निर्णय के पीछे कई बाते/तत्व भी होते है जैसे अगले दिन शूट किए
जाने वाले दृश्यों से सम्बन्धित कलाकार, सेट की तैयारी, सजों-समान (Properties) उपलब्ध होना आदि।
2. शूटिंग
स्क्रिप्ट Ready
रहनी चाहिए और शूटिंग स्क्रिप्ट पर यदि निर्देशक कार्ये करता
है तो उसे शाट विभाजन करने में कोई परेशानी
नहीं होगी।
3. निर्देशक
को शाट लेने से पहले या शूटिंग शुरू करने से पहले कितनी भी तैयारी कर ली हो या
शूटिंग तथा सारी पटकथा (Mater Scene Script) कितनी भी चुस्त हो, शूटिंग के एक दिन पहले उसे Home Work अवश्य कर लेना चाहिए की उसने किन किन शाट को लेना है ।
4. एक नई फिल्म में शाट शुरू करने से पहले
निर्देशक को एक मीटिंग रखनी चाहिए ताकि सभी अपना काम सही से कर सके ताकि निर्देशक
को शाट लेने से पहले लंबे भाषण की जरूरत न हो जिससे सबकी एकाग्रहता भंग न हो इस
प्रकार सभी शाट लेने की तैयारी करते है छायाकार अपना केमेरा लगा के उसको movement तथा शाट की Composition/ Framing करता है Electrician तथा studio boys प्रकाश व्यवस्था करते है। कला निर्देशक अन्तिम समय की मंच
सज्जा तैयार करता है Recordist अपने Microphone को सही स्थान पर रखता है ताकी वो शाट लेते समय फ्रेम में
ना आए ।
5. आज का समय तकनीक का समय है और इस तकनीक को इस्तेमाल किया जाना चाहिए, आज के समय में केमरे के साथ T.V या Monitor लगा दिये जाते है जिससे केमरे द्वारा लिया जाने वाला पूरा
दृश्य दिखाई देता है और शाट की
सफाई में उसे देखने,समझने में आसानी होती है।अत:T.V या Monitor की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।
संदर्भसूची
फिल्म निर्देशन –कुलदीप सिन्हा
प्रकाशन -राधा कृष्ण प्राइवेट लिमिटेड 7/41,
अंसारी रोड ,
दरियागंज नई
दिल्ली -110002।
संस्करण- 2007
कक्षा व्याख्यान
– डा॰ रयाज़ हसन, डा॰ सुरेश शर्मा ।

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